हिमाचल में चिट्टा तस्करों पर सरकार का बड़ा प्रहार, 5,642 NDPS मामले दर्ज; 8,250 से अधिक आरोपी गिरफ्तार

डलहौज़ी हलचल (शिमला)। हिमाचल प्रदेश में चिट्टा और अन्य मादक पदार्थों की तस्करी के खिलाफ राज्य सरकार ने जीरो टॉलरेंस की नीति के तहत कार्रवाई तेज कर दी है। सरकार के अनुसार, तीन वर्षों की अवधि में एनडीपीएस अधिनियम के तहत 5,642 मामले दर्ज किए गए और 8,250 से अधिक आरोपियों को गिरफ्तार किया गया। […]
हिमाचल में चिट्टा तस्करों पर सरकार का बड़ा प्रहार, 5,642 NDPS मामले दर्ज; 8,250 से अधिक आरोपी गिरफ्तार

डलहौज़ी हलचल (शिमला)। हिमाचल प्रदेश में चिट्टा और अन्य मादक पदार्थों की तस्करी के खिलाफ राज्य सरकार ने जीरो टॉलरेंस की नीति के तहत कार्रवाई तेज कर दी है। सरकार के अनुसार, तीन वर्षों की अवधि में एनडीपीएस अधिनियम के तहत 5,642 मामले दर्ज किए गए और 8,250 से अधिक आरोपियों को गिरफ्तार किया गया। इसके अलावा, वर्ष 2024 से 2026 के दौरान नशा तस्करी से संबंधित 115 मामलों में करीब 91.24 करोड़ रुपये मूल्य की संपत्तियां फ्रीज की गईं। मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू के नेतृत्व में सरकार ने नशा तस्करी के नेटवर्क को तोड़ने, युवाओं को नशे से बचाने और प्रभावित व्यक्तियों के उपचार एवं पुनर्वास पर विशेष जोर दिया है।

नशा तस्करों के खिलाफ सख्त कार्रवाई, सरकारी कर्मचारी भी जांच के दायरे में

प्रदेश सरकार ने स्पष्ट किया है कि नशा तस्करी में संलिप्त किसी भी व्यक्ति को राजनीतिक, आर्थिक या सामाजिक प्रभाव के आधार पर संरक्षण नहीं दिया जाएगा। उपलब्ध सरकारी जानकारी के अनुसार, कार्रवाई के दौरान 139 सरकारी कर्मचारी भी जांच और कार्रवाई के दायरे में आए। इनमें राज्य सरकार के 15 कर्मचारियों और पुलिस विभाग के 22 कर्मियों को सेवा से बर्खास्त किए जाने की जानकारी दी गई है।

प्रवर्तन एजेंसियां बार-बार नशा तस्करी में संलिप्त रहने वाले आरोपियों, संगठित आपूर्ति नेटवर्क और संदिग्ध वित्तीय गतिविधियों पर नजर रख रही हैं। इसके साथ ही पंचायत स्तर तक संदिग्ध गतिविधियों की पहचान करने और स्थानीय निगरानी व्यवस्था को मजबूत बनाने के प्रयास किए जा रहे हैं।

नशे के खिलाफ कानूनी व्यवस्था मजबूत करने के लिए दो विधेयक पारित

नशा तस्करी पर प्रभावी अंकुश लगाने के उद्देश्य से मार्च 2025 में हिमाचल प्रदेश विधानसभा ने दो महत्वपूर्ण विधेयक पारित किए। इनमें हिमाचल प्रदेश ड्रग्स एंड कंट्रोल्ड सब्सटेंसेज विधेयक, 2025 और हिमाचल प्रदेश ऑर्गेनाइज्ड क्राइम्स (प्रिवेंशन एंड कंट्रोल) विधेयक, 2025 शामिल हैं।

पहले विधेयक का उद्देश्य नशीले पदार्थों की रोकथाम, आरोपियों के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई और उपचार एवं पुनर्वास व्यवस्था को सुदृढ़ करना है। वहीं, दूसरे विधेयक का उद्देश्य संगठित आपराधिक नेटवर्क के खिलाफ कार्रवाई को अधिक प्रभावी बनाना है।

नशा तस्करों की अवैध संपत्तियों पर कार्रवाई

सरकार की रणनीति केवल गिरफ्तारियों तक सीमित नहीं है। नशा तस्करी से अर्जित कथित अवैध संपत्तियों की पहचान कर उन्हें फ्रीज करने के लिए भी वित्तीय जांच तेज की गई है।

पीआईटी-एनडीपीएस कानून के तहत दिसंबर 2025 तक 46 बड़े नशा तस्करों को निरुद्ध किए जाने और लगभग 46 करोड़ रुपये की अवैध संपत्तियों को जब्त किए जाने की जानकारी दी गई है।

वर्ष 2024 से 2026 के दौरान प्रदेश के विभिन्न जिलों और पुलिस जिलों में कुल 115 मामलों में लगभग 91.24 करोड़ रुपये मूल्य की संपत्तियां फ्रीज की गईं। जिला स्तर पर कार्रवाई का विवरण इस प्रकार है:

  • पुलिस जिला नूरपुर: 14 मामलों में 22.28 करोड़ रुपये।
  • सोलन: 15 मामलों में 17.86 करोड़ रुपये।
  • शिमला: 16 मामलों में 12.61 करोड़ रुपये।
  • ऊना: 2 मामलों में 10.98 करोड़ रुपये।
  • सिरमौर: 7 मामलों में 8.84 करोड़ रुपये।
  • कांगड़ा: 8 मामलों में 6.24 करोड़ रुपये।
  • मंडी: 8 मामलों में 3.62 करोड़ रुपये।
  • पुलिस जिला बद्दी: 21 मामलों में 5.12 करोड़ रुपये।
  • बिलासपुर: 19 मामलों में 2.19 करोड़ रुपये।
  • पुलिस जिला देहरा: 3 मामलों में 89.65 लाख रुपये।
  • कुल्लू: 2 मामलों में 19.02 लाख रुपये।

वर्षवार आंकड़ों के अनुसार, 2024 में 12 मामलों में 25.43 करोड़ रुपये, 2025 में 27 मामलों में 23.98 करोड़ रुपये और 2026 में 76 मामलों में 41.42 करोड़ रुपये मूल्य की संपत्तियां फ्रीज की गईं।

इन कार्रवाइयों का उद्देश्य नशा तस्करी से जुड़े आर्थिक नेटवर्क को कमजोर करना और अवैध कमाई से अर्जित संपत्तियों पर कानूनी शिकंजा कसना है।

चिट्टा तस्करी की सूचना देने पर 10 हजार से 10 लाख रुपये तक का इनाम

नशे के खिलाफ अभियान में आम नागरिकों की भागीदारी बढ़ाने के लिए मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने 1 दिसंबर 2025 को धर्मशाला में आयोजित चिट्टा विरोधी जागरूकता वॉकाथॉन के दौरान चिट्टा सूचना पुरस्कार योजना का शुभारंभ किया।

इस योजना के तहत चिट्टा तस्करी से संबंधित सूचना देने वालों के लिए 10 हजार रुपये से लेकर 10 लाख रुपये तक के नकद पुरस्कार का प्रावधान किया गया है। नागरिक आपातकालीन हेल्पलाइन नंबर 112 के माध्यम से सूचना दे सकते हैं। सूचना देने वालों की पहचान गोपनीय रखने पर भी विशेष बल दिया गया है।

इसके अतिरिक्त, पुलिस और स्थानीय समुदायों के बीच समन्वय बेहतर बनाने के लिए एंटी-चिट्टा वालंटियर टीमों के गठन का प्रस्ताव रखा गया है, ताकि संदिग्ध गतिविधियों की जानकारी समय रहते पुलिस तक पहुंच सके।

‘खेलो हिमाचल-चिट्टा मुक्त हिमाचल’ अभियान से युवाओं को जोड़ने की पहल

प्रदेश सरकार का मानना है कि नशे की समस्या का स्थायी समाधान केवल कानूनी कार्रवाई से संभव नहीं है। इसके लिए युवाओं को खेलकूद, शारीरिक गतिविधियों और रचनात्मक कार्यों से जोड़ना भी जरूरी है।

इसी उद्देश्य से ‘खेलो हिमाचल-चिट्टा मुक्त हिमाचल’ पहल के माध्यम से युवाओं को सकारात्मक गतिविधियों के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है। शिमला, धर्मशाला, हमीरपुर, ऊना और बिलासपुर में आयोजित जागरूकता वॉकाथॉन के जरिए भी चिट्टे और अन्य मादक पदार्थों के दुष्प्रभावों के प्रति जनजागरूकता बढ़ाने का प्रयास किया गया है।

इन पहलों के माध्यम से परिवारों, शिक्षण संस्थानों और स्थानीय समुदायों को नशामुक्त हिमाचल के अभियान से जोड़ने पर जोर दिया जा रहा है।

नशे से प्रभावित लोगों के उपचार और पुनर्वास पर भी जोर

प्रदेश सरकार की रणनीति में नशा तस्करों के खिलाफ कठोर कार्रवाई के साथ-साथ नशे की समस्या से प्रभावित व्यक्तियों को उपचार और पुनर्वास उपलब्ध करवाना भी शामिल है।

शिमला जिले के मशोबरा स्थित नव-जीवन महिला नशामुक्ति एवं पुनर्वास केंद्र में महिलाओं के लिए विशेष देखभाल की व्यवस्था की गई है। यहां चिकित्सा उपचार, मनोवैज्ञानिक परामर्श, आवास और पुनर्वास संबंधी सहायता उपलब्ध करवाने पर ध्यान दिया जा रहा है।

इसके अतिरिक्त, डॉ. राजेंद्र प्रसाद राजकीय चिकित्सा महाविद्यालय, टांडा में एक अन्य नशामुक्ति एवं पुनर्वास केंद्र स्थापित करने की योजना है। सिरमौर जिले के कोटला बड़ोग में 100 बिस्तरों की क्षमता वाला आधुनिक नशामुक्ति एवं पुनर्वास केंद्र भी विकसित किया जा रहा है।

नशामुक्ति, रोकथाम और पुनर्वास संबंधी प्रयासों को मजबूत करने के लिए प्रदेश सरकार ने नशामुक्ति रोकथाम एवं पुनर्वास बोर्ड का गठन भी किया है। जिला स्तर पर उपचार, परामर्श और पुनर्वास सेवाओं के विस्तार पर जोर दिया जा रहा है, ताकि प्रभावित व्यक्तियों को स्वस्थ जीवन की ओर लौटने का अवसर मिल सके।

सरकार का लक्ष्य: नशा तस्करी पर अंकुश और नशामुक्त हिमाचल

हिमाचल प्रदेश सरकार की रणनीति में नशा तस्करों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई, अवैध संपत्तियों पर शिकंजा, नागरिकों की भागीदारी, युवाओं को सकारात्मक गतिविधियों से जोड़ना और नशे से प्रभावित लोगों का पुनर्वास शामिल है।

सरकार का उद्देश्य चिट्टा तस्करी के नेटवर्क को कमजोर करने के साथ-साथ युवाओं को नशे की गिरफ्त से बचाना और प्रभावित व्यक्तियों को समाज की मुख्यधारा में वापस लाना है। हालांकि, इस अभियान की सफलता के लिए कानून प्रवर्तन एजेंसियों के साथ परिवारों, शिक्षण संस्थानों और स्थानीय समुदायों की सक्रिय भागीदारी भी महत्वपूर्ण होगी।

डलहौज़ी हलचल | आइना सच का

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