आपदा में जब मोबाइल और नेटवर्क हो जाएं ठप, तब काम आएगा हैम रेडियो

मंडी में हैम रेडियो को आपदा के दौरान वैकल्पिक संचार माध्यम के रूप में उपयोग करने के लिए तीन दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू हुआ।
आपदा में जब मोबाइल और नेटवर्क हो जाएं ठप, तब काम आएगा हैम रेडियो

डलहौज़ी हलचल | मंडी हिमाचल प्रदेश राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण एवं जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण मंडी के संयुक्त तत्वावधान में डीआरडीए सभागार मंडी में ‘हैम रेडियो—आपातकालीन स्थितियों और आपदाओं के दौरान वैकल्पिक संचार’ विषय पर तीन दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम बुधवार को शुरू हुआ। कार्यक्रम का शुभारंभ उपायुक्त एवं जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण मंडी के अध्यक्ष अपूर्व देवगन ने किया।

आपदा में संचार व्यवस्था बेहद महत्वपूर्ण

उपायुक्त अपूर्व देवगन ने कहा कि आपदा के दौरान संचार व्यवस्था सबसे महत्वपूर्ण आवश्यकताओं में से एक होती है। हिमाचल प्रदेश की भौगोलिक परिस्थितियों के कारण भूस्खलन, बाढ़, बादल फटने और भारी बर्फबारी जैसी आपदाओं के दौरान सड़क, बिजली और दूरसंचार सेवाएं प्रभावित हो सकती हैं।

ऐसे समय में हैम रेडियो वैकल्पिक संचार माध्यम के रूप में प्रशासन, राहत और बचाव एजेंसियों के लिए बेहद उपयोगी साबित हो सकता है।

उन्होंने प्रशिक्षण में भाग ले रहे प्रतिभागियों से तकनीकी ज्ञान और कौशल का उपयोग आपदा एवं आपातकालीन परिस्थितियों में करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि हिमाचल जैसे पहाड़ी राज्य में प्रशिक्षित हैम रेडियो ऑपरेटरों का मजबूत नेटवर्क आपदा प्रबंधन व्यवस्था को और प्रभावी बनाने में मददगार होगा।

20 से 22 अगस्त तक चलेगा प्रशिक्षण

तीन दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम 20 से 22 अगस्त तक आयोजित किया जा रहा है। इसमें मंडी सहित लाहौल-स्पीति, बिलासपुर, कुल्लू, हमीरपुर और कांगड़ा जिलों के लाइसेंसधारी प्रतिभागी हिस्सा ले रहे हैं।

प्रशिक्षण के दौरान प्रतिभागियों को हैम रेडियो संचालन, आपातकालीन संचार व्यवस्था, रेडियो संचार प्रोटोकॉल, संचार तकनीक और उपकरणों के व्यावहारिक उपयोग की जानकारी दी जा रही है।

एंटीना से सैटेलाइट संचार तक दी जा रही जानकारी

प्रशिक्षक नीलकंठ चटर्जी ने बताया कि आपदा के दौरान जब पारंपरिक संचार नेटवर्क बाधित या पूरी तरह ठप हो जाते हैं, तब हैम रेडियो महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

प्रतिभागियों को एंटीना से लेकर सैटेलाइट आधारित संचार तक विभिन्न तकनीकों की जानकारी देने के साथ आपातकालीन परिस्थितियों में प्रभावी संचार स्थापित करने का व्यावहारिक प्रशिक्षण भी दिया जा रहा है।

उन्होंने कहा कि प्राकृतिक आपदा अथवा अन्य आपातकालीन स्थिति में पारंपरिक संचार माध्यमों के बाधित होने पर हैम रेडियो विश्वसनीय वैकल्पिक संचार प्रणाली के रूप में काम कर सकता है। सूचनाओं का त्वरित आदान-प्रदान राहत एवं बचाव कार्यों को प्रभावी बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

प्रशिक्षण में एमेच्योर रेडियो भारत (ऑस्कर इंडिया) से नीलकंठ चटर्जी, विल्किस वॉल्टर जैम्स और सयानी डे प्रशिक्षक के रूप में सेवाएं दे रहे हैं।

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