शिमला में गूंजा बिलासपुर का नाम, साहित्य सृजन सारथी सम्मान से नवाज़े गए दो साहित्यकार
डलहौज़ी हलचल | शिमला
साहित्य सृजन कुटुम्ब दिल्ली द्वारा आयोजित सम्मान समारोह एवं कवि सम्मेलन का आयोजन शिमला के रोटरी क्लब सभागार में किया गया। कार्यक्रम में प्रदेश और देश के प्रतिष्ठित साहित्यकारों ने भाग लिया। समारोह में बिलासपुर के दो साहित्यकारों, डॉ. जय अनजान और रविंद्र चंदेल कमल को साहित्य के क्षेत्र में उनके उल्लेखनीय योगदान के लिए ‘साहित्य सृजन सारथी सम्मान’ से सम्मानित किया गया।
सम्मान समारोह और कवि सम्मेलन का हुआ आयोजन
कार्यक्रम के प्रथम सत्र में सम्मान समारोह तथा द्वितीय सत्र में कवि सम्मेलन आयोजित किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ मां शारदा के समक्ष दीप प्रज्ज्वलन और माल्यार्पण के साथ हुआ।
कार्यक्रम में वरिष्ठ साहित्यकार एस.आर. हरनोट और डॉ. सत्यनारायण स्नेही ने मुख्य अतिथि एवं विशिष्ट अतिथि के रूप में शिरकत की, जबकि कार्यक्रम की अध्यक्षता डॉ. संतोष संप्रीति ने की।
डॉ. जय अनजान की साहित्य साधना को मिली पहचान
बिलासपुर से संबंध रखने वाले साहित्यकार, लेखक, कवि और समीक्षक डॉ. जय अनजान को उनकी साहित्यिक उपलब्धियों के लिए सम्मानित किया गया। गणित विषय के सहायक आचार्य होने के बावजूद हिंदी साहित्य के प्रति उनकी गहरी रुचि और समर्पण ने उन्हें राज्य एवं राष्ट्रीय स्तर पर विशिष्ट पहचान दिलाई है।
उनकी कविताएं, लघुकथाएं, समीक्षाएं और लेख देश की प्रतिष्ठित पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित होते रहे हैं। इसके साथ ही वे कहलूरी बोली के संरक्षण और प्रचार-प्रसार के लिए भी निरंतर प्रयासरत हैं। कार्यक्रम में प्रस्तुत उनकी कविता “मेरा गांव अब शहर हो गया है” को श्रोताओं ने खूब सराहा।
रविंद्र चंदेल कमल की रचनाओं ने जीता दिल
बिलासपुर के साहित्यकार एवं पत्रकार रविंद्र चंदेल कमल को भी साहित्य, कला और संस्कृति के संरक्षण एवं संवर्धन में उनके योगदान के लिए सम्मानित किया गया।
लगभग 25 वर्षों से अधिक समय से वे प्रदेश और देश के विभिन्न मंचों पर अपनी कला और साहित्यिक प्रतिभा का प्रदर्शन करते आ रहे हैं। उन्होंने हिंदी और पहाड़ी भाषा में अनेक रचनाएं लिखी हैं तथा विभिन्न सांस्कृतिक और साहित्यिक संस्थाओं से सक्रिय रूप से जुड़े हुए हैं।
कवि सम्मेलन में उनकी स्वरचित कविता “वीरों की इस पावन धरा पर हर पग आगे बढ़ता हूं” को श्रोताओं ने खूब सराहा और तालियों की गड़गड़ाहट से स्वागत किया।
साहित्य और संस्कृति के संरक्षण का दिया संदेश
कार्यक्रम में वक्ताओं ने साहित्य, भाषा और संस्कृति के संरक्षण की आवश्यकता पर बल दिया। साहित्यकारों ने अपने विचारों और रचनाओं के माध्यम से समाज में सकारात्मक चेतना और सांस्कृतिक मूल्यों को बढ़ावा देने का संदेश दिया।
समारोह में हिमाचल प्रदेश सहित देश के विभिन्न हिस्सों से आए साहित्यकारों, कवियों और साहित्य प्रेमियों की उपस्थिति रही, जिससे कार्यक्रम एक यादगार साहित्यिक आयोजन बन गया।
